रीवा, मध्य प्रदेश: मऊगंज थाना क्षेत्र से एक गंभीर सड़क हादसे की खबर सामने आई है, जिसने स्थानीय कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 14 जनवरी की शाम 6 बजे, ग्राम छोटी बराती, पोस्ट दिघवार निवासी पुष्पराज शुक्ला (30 वर्ष) और उनके साथ गांव के ही राजभान साकेत (55 वर्ष) अपने घर लौट रहे थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों अपने हीरो एचएफ डीलक्स बाइक (MP17 MU 6862) से लौट रहे थे और सड़क किनारे बाइक रोककर खड़े थे। इसी दौरान पीछे से तेज रफ्तार में आई एक फोर-व्हीलर कार ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयानक थी कि कार सीधे दोनों के ऊपर चढ़ गई।
हादसे में गंभीर चोटें
पुष्पराज शुक्ला: हाथ और पैर में गंभीर फ्रैक्चर
राजभान साकेत: पैर टूटने के साथ गंभीर अंदरूनी चोटें
आसपास मौजूद लोगों की मदद से दोनों घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी हालत गंभीर बताई। डॉक्टरों का कहना है कि दोनों को लंबे समय तक इलाज और पूर्ण आराम की आवश्यकता है।
शराब पिलाकर झूठा केस बनाने की साजिश का आरोप
पीड़ित पुष्पराज शुक्ला ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद जब वे घायल अवस्था में थे, तब मिंटू पांडे और मोनू पांडे मौके पर पहुंचे और कथित तौर पर जबरन उनके मुंह में शराब डाल दी। आरोप है कि उनके कपड़ों पर भी शराब उड़ेल दी गई।
उनका कहना है कि यह सब जानबूझकर किया गया ताकि पुलिस को यह दिखाया जा सके कि वे शराब पीकर बाइक चला रहे थे और दुर्घटना उनकी गलती से हुई, जिससे आरोपी बच निकलें।
पुलिस की भूमिका पर सवाल
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि हादसे के बाद पुलिस ने आरोपी कार को केवल औपचारिकता के लिए थाने में खड़ा किया, लेकिन मात्र दो दिन बाद बिना किसी ठोस कार्रवाई के वाहन छोड़ दिया गया। न तो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और न ही गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया।
परिजनों का कहना है कि वे लगातार थाना, चौकी और अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। दोनों घायल अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं, वहीं आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं।
ग्रामीणों में आक्रोश
इस घटना को लेकर पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि रसूखदार लोगों को बचाने के लिए पुलिस आंख मूंदे बैठी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
पीड़ित परिवारों की मांगें
1. निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच
2. आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी
3. सख्त धाराओं में मामला दर्ज करना
4. दोनों घायलों को उचित मुआवजा
निष्कर्ष
यह मामला केवल एक सड़क हादसा नहीं बल्कि सामाजिक अन्याय और कानून की लापरवाही का प्रतीक बनता जा रहा है। अब सवाल यह उठता है कि क्या मऊगंज पुलिस समय रहते पीड़ितों को न्याय दिलाएगी, या यह मामला दबंगई और लापरवाही की भेंट चढ़ जाएगा।
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