प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को सोमनाथ मंदिर के अमृत महोत्सव में शामिल हो रहे हैं। ये आयोजन सोमनाथ के नए मंदिर परिसर के 75 साल पूरे होने के अवसर पर किया जा रहा है। ये वही ऐतिहासिक सोमनाथ का मंदिर है जिसे 17 बार लूटा गया, तोड़ा गया लेकिन सनातन की पताका हमेशा लहराती रही। आजादी के बाद देश में सबसे पहले जिस मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया गया वो सोमनाथ का ही मंदिर है। ये पहला मंदिर है जिसका उद्घाटन देश के पहले राष्ट्रपति डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद ने किया। आज जब इस पावन ज्योतिर्लिंग में अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है तो पीएम मोदी इसके 90 मीटर ऊंचे शिखर पर कुंभाभिषेक करेंगे जिसके लिए 11 तीर्थों का पवित्र जल लाया गया है।
कार्यक्रम में क्या-क्या होगा?
सोमनाथ मंदिर में कार्यक्रम के दौरान 51 ब्राह्मण रुद्र पाठ और वैदिक मंत्रोच्चार करेंगे। वहीं, महारुद्र यज्ञ में 1.25 लाख आहुतियां अर्पित की जाएंगी। इसके बाद सोमनाथ मंदिर के गौरव को आसमान से सलामी दी जाएगी। एयरफोर्स के सूर्यकिरण विमान सनातन के इस अडिग संकल्प को आसमान से सलाम करेंगे और भव्य फ्लाईपास्ट होगा। सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ पर पहली बार मंदिर के शिखर पर कुंभाभिषेक किया जाएगा।
सोमनाथ मंदिर की मान्यताएं
श्री सोमनाथ महादेव वह पवित्र भूमि मानी जाती है, जहां चंद्रमा की तपस्या और भक्ति से प्रसन्न होकर, भगवान शिव ने उन्हें आशीर्वाद दिया और उन्हें अंधेरे के श्राप से मुक्त किया। यह भी माना जाता है कि यह वह स्थान है जहां भगवान श्री कृष्ण ने अपनी अंतिम यात्रा की थी। माना जाता है कि सोमनाथ का मंदिर 4 चरणों में बनाया गया था- भगवान सोम द्वारा सोने से, रवि द्वारा चांदी से, भगवान कृष्ण द्वारा लकड़ी से और राजा भीमदेव द्वारा पत्थर से। सोमनाथ मंदिर में गर्भगृह, सभामंडप और नृत्यमंडप हैं, जिसका शिखर 155 फीट ऊंचा है। शिखर के ऊपर कलश का वजन 10 टन है और ध्वजदंड 27 फीट ऊंचा और 1 फुट परिधि का है। मौजूदा मंदिर कैलाश महामेरु प्रसाद शैली में बना है। महारानी अहिल्याबाई द्वारा जीर्णोद्धार किया गया मंदिर मुख्य मंदिर परिसर के पास है।
सोमनाथ मंदिर पर कब-कब हुआ हमला?
- 1026 ईस्वी- गजनवी ने तोड़ा (कुल 17 बार हमले किए)
- 1311 ईस्वी- अलाउद्दीन खिलजी के आदेश पर विध्वंस
- 1326 ईस्वी- मुहम्मद बिन तुगलक ने किया हमला
- 1395 ईस्वी- दिल्ली सल्तनत के जफर खान ने बोला धावा
- 1451 ईस्वी- महमूद बेगड़ा ने भी सोमनाथ मंदिर लूटा
- 17वीं सदी- औरंगजेब ने सोमनाथ मंदिर तुड़वाया
सोमनाथ मंदिर की खासियत
- देश के 12 ज्योतिर्लिंग में सोमनाथ पहला
- शास्त्रों, पुराणों और लोक परंपरा में महत्व
- सोमनाथ मंदिर का स्कंद पुराण में वर्णन
- चंद्रदेव के मंदिर की स्थापना की मान्यता
- सोमनाथ मंदिर की ऊंचाई 155 फीट है
- सोमनाथ मंदिर दो मंजिला है
- मंदिर का ध्वजदंड 11 मीटर लंबा है
- 1,666 स्वर्ण-मंडित कलश
- कलश का वजन 10 टन
सोमनाथ मंदिर के रहस्य
- प्राचीन मंदिर लकड़ी के 56 खंभों पर टिका था
- मुख्य मूर्ति बिना किसी सहारे के हवा में लटकी थी
- प्राचीन सोमनाथ मंदिर की छत स्वर्ण जड़ित थी
- शिवलिंग मंदिर में जमीन से दो फीट की ऊंचाई पर था
- 40 मन वजनी सोने का घंटा मंदिर में लटका था
- महमूद गजनवी ने मंदिर से 6 टन सोना लूटा
सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण
- 1947 में मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य शुरू हुआ
- सरदार वल्लभभाई पटेल ने पुनर्निर्माण शुरू कराया
- सौराष्ट्र के पूर्व राजा दिग्विजय सिंह ने आधारशिला रखी
- 8 मई 1950 को मंदिर पुनर्निर्माण की आधारशिला रखी गई
- 11 मई 1951 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उद्घाटन किया
- आधुनिक सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण 1961 में पूरा हुआ
- 1995 में सोमनाथ मंदिर को राष्ट्र को समर्पित किया गया
