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विधवा महिला की पुकार: कब्जा, धमकी, भ्रष्टाचार और पुलिस की चुप्पी से दहला बारां, वर्षों से न्याय की तलाश में भटक रहा परिवार

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बारां/अटरू। राजस्थान के बारां जिले के कवाई-सालपुरा क्षेत्र से सामने आया एक मामला अब केवल जमीन विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही, पुलिस कार्यप्रणाली और एक गरीब विधवा परिवार की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। पीड़िता रेखाबाई ने आरोप लगाया है कि दबंगों द्वारा लगातार प्रताड़ित किए जाने, बेटे की संदिग्ध मौत और जान से मारने की धमकियों के बावजूद उसे कहीं भी न्याय नहीं मिल रहा।

रेखाबाई का कहना है कि उसके पति की करीब 10-12 वर्ष पहले मौत हो चुकी है और वह मजदूरी कर अपने बच्चों का पालन-पोषण कर रही थी। महिला के अनुसार गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों ने पहले उसके मकान और आम रास्ते पर कब्जा करने की कोशिश शुरू की। विरोध करने पर लगातार गाली-गलौज, मारपीट और धमकियां दी जाने लगीं। पीड़िता का आरोप है कि दबंगों का स्थानीय स्तर पर इतना प्रभाव है कि पुलिस भी उनके खिलाफ कार्रवाई करने से बचती रही।

मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब महिला के बड़े बेटे की तालाब में डूबने से मौत हो गई। जहां पुलिस ने प्रारंभिक जांच में इसे हादसा बताया, वहीं परिवार ने इसे सुनियोजित हत्या करार दिया। परिजनों का कहना है कि मृतक के शरीर और चेहरे पर चोट के निशान थे, जिससे उन्हें साजिश की आशंका हुई। बेटे की मौत के बाद परिवार ने मोर्चरी के बाहर विरोध प्रदर्शन भी किया, लेकिन बाद में पुलिस के निष्पक्ष जांच के आश्वासन पर शांत हो गए।

पीड़िता का आरोप है कि बेटे की मौत के बाद भी आरोपियों पप्पू पुत्र सुरेंद्रर द्वारा लगातार धमकियां दी जा रही हैं। आए दिन झगड़ा करना, डराना-धमकाना और जान से मारने की चेतावनी देना अब परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। महिला ने दावा किया कि जब भी वह थाने शिकायत लेकर पहुंचती है तो पुलिस दोनों पक्षों को पकड़कर बैठा लेती है और फिर पैसे लेकर छोड़ देती है, लेकिन कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करती।

रेखाबाई ने महिला थाना, जिला पुलिस अधीक्षक, पंचायत समिति, मुख्यमंत्री कार्यालय और राजस्थान संपर्क पोर्टल तक कई बार शिकायतें दर्ज करवाईं। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने से परिवार में भय और निराशा का माहौल है। महिला का कहना है कि यदि समय रहते न्याय नहीं मिला तो उसके परिवार के साथ कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से जमीन कब्जाने, दबंगई और पुलिस की निष्क्रियता के मामले बढ़ते जा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव में गरीब परिवारों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जाता। अब गांव के कई लोग इस मामले में निष्पक्ष जांच और उच्च स्तरीय हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

पीड़िता ने सरकार और प्रशासन से अपील की है कि उसके बेटे की मौत की निष्पक्ष जांच कराई जाए, परिवार को सुरक्षा दी जाए और आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि उसे और उसके बच्चों को न्याय मिल सके।

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