मऊ। उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के दोहरीघाट थाना क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने अपनी पैतृक आबादी की जमीन पर मकान निर्माण रोकने, जबरन कब्जे की कोशिश और स्थानीय पुलिस पर निष्पक्ष कार्रवाई न करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित महिला का कहना है कि कई बार अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे पूरा परिवार भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोहरीघाट थाना क्षेत्र के भगवान दास की निवासी केवली देवी ने मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और थानाध्यक्ष को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि गांव के कुछ लोगों ने उनके हिस्से की पैतृक आबादी की जमीन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। महिला का कहना है कि जब वह अपने हिस्से में मकान का निर्माण कराने लगीं तो आरोपितों ने निर्माण कार्य जबरन रुकवा दिया और लगातार विरोध करने लगे।
महिला का आरोप है कि विवादित पक्ष पहले से ही अपने हिस्से से अधिक जमीन पर कब्जा किए हुए हैं और अब उनके वैध हिस्से पर भी दावा कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिस जमीन पर वह मकान बना रही हैं, वह उनके पूर्वजों के समय से उनके परिवार के कब्जे में है और उसी पर निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन विरोधी पक्ष उन्हें ऐसा नहीं करने दे रहा।
शिकायत में स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। महिला ने आरोप लगाया है कि मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने विवाद का निष्पक्ष समाधान करने के बजाय उन्हें ही निर्माण कार्य रोकने की नसीहत दी। इतना ही नहीं, महिला का दावा है कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें फर्जी मुकदमे में फंसाने तक की धमकी दी। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी पक्ष से मिलीभगत के कारण उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
केवली देवी का कहना है कि उन्होंने 15 जून 2026 को पुलिस अधीक्षक सहित अन्य अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग की थी, लेकिन कार्रवाई न होने के कारण उन्हें मुख्यमंत्री तक गुहार लगानी पड़ी। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो कभी भी बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है।
पीड़ित परिवार का कहना है कि न्याय की आस में वह लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, लेकिन कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही है। परिवार का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। ऐसे में उन्हें डर है कि कहीं उनका पुश्तैनी आशियाना और जमीन दोनों हाथ से न निकल जाएं।
फिलहाल मामले में प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल भूमि विवाद का मामला होगा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा। पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई और उनके निर्माण कार्य को सुरक्षा के साथ पूरा कराने की मांग की है।

