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होर्मुज हमले में बाल-बाल बचे नाविकों का बड़ा कदम, थाईलैंड में शिपिंग कंपनी पर ठोका मुकदमा

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होर्मुज जलडमरूमध्य में हमले से बचे 3 थाई नाविकों ने अपनी शिपिंग कंपनी पर श्रम अधिकारों के उल्लंघन और अनुचित बर्खास्तगी का मुकदमा दायर किया। नाविकों का आरोप है कि सुरक्षा जोखिम के बावजूद जहाज भेजा गया था।
होर्मुज हमले से बचे तीन थाई नाविकों ने शिपिंग कंपनी पर श्रम अधिकारों के उल्लंघन का मुकदमा दायर किया।
नाविकों का आरोप है कि खतरे के बावजूद जहाज को होर्मुज से भेजा गया और फिर उन्हें नौकरी से निकाला गया।
हमले के बाद PTSD से जूझ रहे नाविकों ने प्रति व्यक्ति 10 लाख थाई बहत से अधिक मुआवजे की मांग की है।
बैंकॉक: होर्मुज जलडमरूमध्य में मार्च महीने में हुए हमले के बाद बचाए गए थाईलैंड के एक मालवाहक जहाज के 3 पूर्व नाविकों ने शुक्रवार को जहाज को चलाने वाली कंपनी के खिलाफ श्रम अधिकारों के उल्लंघन और अनुचित तरीके से नौकरी से निकालने का मुकदमा दायर किया है। मार्च 11 को ओमान के उत्तर में स्थित ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में ‘मयूरी नारी’ नाम का जहाज एक गोले की चपेट में आ गया था। इस हमले में जहाज पर सवार 3 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि चालक दल के बाकी 20 सदस्यों को करीब एक हफ्ते बाद सुरक्षित बचाकर थाईलैंड वापस लाया गया था।
खतरे के बावजूद जहाज को होर्मुज से गुजारा’
चालक दल के पूर्व सदस्य पनिथि तुमकाव, नोप्पाडोन वोंगसुवान और सुरदेस मानपुएन ने बैंकॉक की केंद्रीय श्रम अदालत में प्रेशियस शिपिंग कंपनी, उससे जुड़ी दो अन्य कंपनियों और जहाज के कैप्टन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। नाविकों के वकील कुनपत सिंहाथोंग ने आरोप लगाया कि कंपनी ने सुरक्षा जोखिमों के बावजूद जहाज को होर्मुज से गुजरने का फैसला लिया, जिससे चालक दल की जान खतरे में पड़ गई। उन्होंने कहा कि हमले के बाद जहाज चलने लायक नहीं रहा, जिसके कारण कंपनी ने 9 महीने के रोजगार अनुबंध के पूरा होने से पहले ही तीनों नाविकों को नौकरी से निकाल दिया। इसके बदले उन्हें केवल 2 महीने के वेतन के बराबर मुआवजा दिया गया।
मानसिक आघात के कारण परेशानी में नाविक
वकील के अनुसार, यह मुआवजा पर्याप्त नहीं है क्योंकि हमले के बाद तीनों नाविक पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) से पीड़ित हो गए हैं। मानसिक आघात के कारण वे फिलहाल फिर से समुद्री नौकरी करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने बताया कि पहले कंपनी से बातचीत कर मामले को सुलझाने की कोशिश की गई, लेकिन कंपनी ने किसी भी जिम्मेदारी से इनकार कर दिया। इसके बाद अदालत का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया गया। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि कुल कितना मुआवजा मांगा गया है, लेकिन कहा कि प्रत्येक नाविक के लिए 10 लाख थाई बहत या 28 लाख रुपये से अधिक की मांग की गई है।

‘अब तेज आवाज सुनकर भी डर जाता हूं’
10 साल से अधिक समय तक प्रेशियस शिपिंग में काम कर चुके पनिथि तुमकाव ने बताया कि हादसे के बाद उनके व्यवहार में बदलाव आ गया है। उन्होंने कहा, ‘जब भी तेज आवाज सुनाई देती है, मैं घबरा जाता हूं। फिलहाल मैं काम नहीं कर सकता और मुझे दवाइयां लेनी पड़ रही हैं।’ उनकी पत्नी ने उनके बदले हुए व्यवहार को देखकर इलाज कराने की सलाह दी थी। प्रेशियस शिपिंग कंपनी ने इस मामले पर टिप्पणी के लिए भेजे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। हालांकि, 3 जुलाई को जारी एक बयान में कंपनी ने हमले में मारे गए चालक दल के 3 सदस्यों के शवों को थाईलैंड लाने में सहयोग करने वालों का धन्यवाद दिया था।

ईरान-अमेरिका में तनाव से फिर बढ़ी चिंता
इस बीच, गुरुवार को अमेरिका ने ईरान पर नए हवाई हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने मध्य-पूर्व में अमेरिका के सहयोगी देशों को निशाना बनाया। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव से युद्धविराम की कोशिशों पर भी खतरा मंडरा रहा है। इस संघर्ष का असर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर भी पड़ा है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और LNG के लगभग 20 प्रतिशत समुद्री व्यापार का रास्ता इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है। इसका अधिकांश हिस्सा एशियाई देशों के लिए होता है, जहां युद्ध शुरू होने के बाद से ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है।

संयुक्त राष्ट्र ने जताई हालात पर चिंता
फारस की खाड़ी में फंसे नाविकों की सुरक्षा को लेकर भारत, फिलीपींस और थाईलैंड जैसे देशों में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इन देशों के नागरिक बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय जहाजों के चालक दल का हिस्सा होते हैं। संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगुएज ने कहा कि यह केवल जहाजों की आवाजाही का मामला नहीं है। इसके पीछे हजारों नाविक और उनके परिवार हैं, जो इस संघर्ष की मानवीय कीमत चुका रहे हैं।

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