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बाराबंकी में पुश्तैनी जमीन पर कब्जे की कोशिश का आरोप, गाटा संख्या 2835 और 2829 को लेकर बढ़ा विवाद; विरोध करने पर पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी का दावा

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बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के कोतवाली क्षेत्र स्थित देवा रोड के गांधी नगर इलाके में पुश्तैनी जमीन को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि उनकी गाटा संख्या 2835 एवं 2829 की भूमि पर पिछले करीब डेढ़ महीने से जबरन कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। परिवार का कहना है कि विपक्षी पक्ष हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर जेसीबी मशीन से जमीन पर कार्य कराना चाहता है, जबकि आदेश की प्रति मांगने पर कोई दस्तावेज नहीं दिखाया गया। इससे परिवार में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

पीड़ित परिवार के अनुसार, यह जमीन उनके पूर्वजों की पुश्तैनी संपत्ति है, जिस पर बार-बार कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका आरोप है कि रविवार को भी जेसीबी मशीन लगाकर जमीन पर कार्य शुरू कर दिया गया। जब परिवार ने इसका विरोध किया तो कथित तौर पर हाईकोर्ट के आदेश का हवाला दिया गया, लेकिन आदेश की प्रति मांगने पर कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया।

परिवार ने आरोप लगाया है कि राजेश तिवारी और उनके सहयोगी दबंगई के बल पर जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं। पीड़ितों का दावा है कि करीब 15 वर्ष पहले भी गांव के कई लोगों की जमीन पर इसी प्रकार कब्जे के प्रयास किए गए थे और अब एक बार फिर उनकी भूमि को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

पीड़ित परिवार ने बताया कि इस विवाद से प्रभावित परिवार में राम सिंह, संतोष, कमलेश, प्रेमचंद, राकेश, अमर सिंह और सुमिरन लाल सहित कई सदस्य शामिल हैं। उनका कहना है कि पूरी संयुक्त पारिवारिक भूमि पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है और विरोध करने पर जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं।

कमलेश के पुत्र शुभम ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि जब परिवार ने अपनी जमीन पर कब्जा करने का विरोध किया तो उनके साथ मारपीट की गई। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी पक्ष ने खुलेआम धमकी दी कि यदि दोबारा विरोध किया गया तो पूरे परिवार को जान से मारकर वहीं गाड़ दिया जाएगा। इस कथित धमकी के बाद पूरा परिवार भय के साए में जीवन व्यतीत कर रहा है।

पीड़ित परिवार का कहना है कि उनकी आजीविका का मुख्य आधार यही कृषि भूमि है। यदि इस जमीन पर अवैध कब्जा हो जाता है तो परिवार के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। उनका आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक उन्हें प्रभावी राहत नहीं मिली है।

परिवार ने जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और पुलिस से मांग की है कि गाटा संख्या 2835 एवं 2829 की राजस्व अभिलेखों के आधार पर निष्पक्ष जांच कराई जाए, कथित हाईकोर्ट आदेश की सत्यता की पुष्टि की जाए, जबरन कब्जे की कोशिश तत्काल रोकी जाए तथा पूरे परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए। उनका कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा विवाद उत्पन्न हो सकता है।

फिलहाल इस मामले में प्रशासन अथवा विपक्षी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। समाचार में उल्लिखित सभी आरोप पीड़ित परिवार के दावों पर आधारित हैं। मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच और उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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