बीमार पिता के इलाज के दौरान बड़े भाई ने कराई कथित वसीयत: छोटे भाई को पैतृक मकान से किया बेदखल, 15 लाख रुपये की मांग का आरोप

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कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के डेरापुर थाना क्षेत्र के लारपुर पेड़ पंचायत नत्थू गांव में पारिवारिक संपत्ति को लेकर गंभीर विवाद का मामला सामने आया है। पीड़ित पिंटू शर्मा ने आरोप लगाया है कि उनके बड़े भाई ने पिता की बीमारी के दौरान कथित रूप से धोखे से वसीयत करवा ली और अब पैतृक मकान में रहने के लिए उनसे 15 लाख रुपये की मांग कर रहा है। पीड़ित का कहना है कि इस पूरे मामले की उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई और अब उन्हें अपने ही घर में प्रवेश करने से रोका जा रहा है।

पीड़ित पिंटू शर्मा के अनुसार वर्ष 2019 में उनके पिता रामकिशन शर्मा गंभीर रूप से बीमार हो गए थे। इलाज के लिए उन्हें मुंबई के टाटा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। पिंटू शर्मा का कहना है कि उस दौरान पिता के इलाज में अधिकतर खर्च उन्होंने ही उठाया, जबकि उनके बड़े भाई राजेश शर्मा ने कोई आर्थिक सहयोग नहीं किया। इसी बीच वर्ष 2021 में कथित रूप से राजेश शर्मा ने अपने पिता से वसीयत करवा ली, जिसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई। बाद में वर्ष 2023 में इलाज के दौरान ही उनके पिता रामकिशन शर्मा का निधन हो गया।

पीड़ित का कहना है कि उनके पिता ने दोनों भाइयों के लिए अलग-अलग दो मकान बनवाए थे और दोनों मकान लगभग एक जैसे थे ताकि दोनों बेटों को बराबरी का हक मिल सके। इसके बावजूद आरोप है कि बड़े भाई राजेश शर्मा ने लालच में आकर धोखाधड़ी से दोनों मकानों की वसीयत अपने नाम करवा ली। अब स्थिति यह है कि पिंटू शर्मा अपने ही पैतृक घर के अधिकार के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

पिंटू शर्मा ने बताया कि वह मुंबई में रहकर मेहनत मजदूरी करते हैं और उसी से अपने परिवार का भरण-पोषण करते रहे हैं। हाल ही में उनकी बेटी शादी के लायक हो गई है, जिसके लिए उन्होंने सोचा कि गांव में स्थित अपने पैतृक मकान की मरम्मत करवा लें ताकि बेटी की शादी की तैयारियां की जा सकें। लेकिन जब वह गांव पहुंचे तो देखा कि मकान पर ताला लगा हुआ है और उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया।

पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने इस बारे में अपने बड़े भाई राजेश शर्मा से बात की तो उसने साफ तौर पर कहा कि यदि मकान में रहना है तो 15 लाख रुपये देने होंगे, क्योंकि वसीयत उसके नाम हो चुकी है। पिंटू शर्मा का कहना है कि वह एक मजदूर हैं और इतनी बड़ी रकम देना उनके लिए संभव नहीं है।

पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि उनके चाचा जगदीश शर्मा का घर भी पास में ही है और इस विवाद के चलते माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है। पिंटू शर्मा का कहना है कि राजेश शर्मा उन्हें लगातार धमकी देता है कि यदि वह गांव में दिखाई भी दिए तो उन्हें जान से मरवा दिया जाएगा।

बताया जा रहा है कि गांव के प्रधान ने भी इस मामले में हस्तक्षेप कर राजेश शर्मा को समझाने की कोशिश की थी कि वह अपने छोटे भाई का हिस्सा न छीने और पारिवारिक विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाए। लेकिन आरोप है कि राजेश शर्मा ने प्रधान की बात को भी नजरअंदाज करते हुए कहा कि वह उन्हें नहीं जानते और उनके कहने से कोई फर्क नहीं पड़ता।

पीड़ित ने यह भी दावा किया है कि जिस वसीयत के आधार पर उनके बड़े भाई मकान पर कब्जा कर रहे हैं, उसमें गवाह के रूप में शामिल दो लोग भी राजेश शर्मा के ही परिवार से जुड़े हुए हैं। इनमें से एक व्यक्ति उनके मामा महेश शर्मा बताए जा रहे हैं। पिंटू शर्मा का कहना है कि इसी वजह से उन्हें वसीयत की निष्पक्षता पर भी संदेह है और उन्हें लगता है कि यह पूरी प्रक्रिया उनके साथ धोखाधड़ी कर की गई है।

पिंटू शर्मा ने बताया कि इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने न्यायालय में वाद दायर किया हुआ है और लगातार न्याय के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सुनवाई नहीं हो सकी है। उनका कहना है कि इस विवाद के चलते वह मानसिक रूप से काफी परेशान हैं और परिवार के साथ असुरक्षा की भावना में जी रहे हैं।

पीड़ित ने लोगों से अपील भी की है कि जिस मकान को लेकर विवाद चल रहा है, उसे कोई भी व्यक्ति खरीदने का प्रयास न करे, क्योंकि मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर उन्हें उनके पैतृक मकान में रहने का अधिकार दिलाया जाए, ताकि वह अपनी बेटी की शादी सम्मानपूर्वक कर सकें।

 

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