उन्नाव। आज के दौर में जहां अधिकांश लोग अपनी निजी जरूरतों और सुविधाओं तक सीमित हो चुके हैं, वहीं उन्नाव जिले के एक युवक ने अपनी आस्था, मेहनत और सामाजिक सोच से ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसकी क्षेत्रभर में चर्चा हो रही है। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद युवक ने जंगल के बीच स्थित वर्षों पुराने और उपेक्षा का शिकार हो चुके शिव मंदिर का कायाकल्प कर दिया। अब यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।
उन्नाव जिले के हिलोली क्षेत्र अंतर्गत चंडी बक्स खेड़ा, लौवासिंगन खेड़ा निवासी अरुण कुमार ने अपने गांव और आसपास के लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़े एक पुराने शिव मंदिर को नया जीवन देने का संकल्प लिया। स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर जंगल के बीच स्थित होने के कारण वर्षों से उपेक्षित था। मंदिर परिसर में न तो नियमित साफ-सफाई होती थी और न ही रंगाई-पुताई या मरम्मत का कोई कार्य कराया गया था। समय के साथ मंदिर के कई हिस्से जर्जर हो चुके थे और आसपास का वातावरण भी उपेक्षा की कहानी बयां कर रहा था।
ग्रामीणों का कहना है कि अरुण कुमार ने जब मंदिर की बदहाल स्थिति देखी तो उन्होंने इसे सुधारने का निर्णय लिया। आर्थिक रूप से मजबूत न होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत की कमाई तथा बचत के पैसों से मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू कराया।
बताया जा रहा है कि कड़कड़ाती धूप में स्वयं मौके पर मौजूद रहकर उन्होंने मंदिर के कार्यों में योगदान दिया। मंदिर की दीवारों की पुताई करवाई गई, जर्जर हिस्सों की मरम्मत कर प्लास्टर कराया गया और पूरे परिसर को साफ-सुथरा बनाया गया। मंदिर की ऊंचाई अधिक होने के कारण पुताई का कार्य आसान नहीं था, लेकिन इसके बावजूद इसे पूरा कराया गया।
मंदिर परिसर में स्थापित भगवान शंकर और नंदी बाबा की प्रतिमाओं के आसपास भी विशेष रूप से सौंदर्यीकरण कराया गया। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर के सामने एक चबूतरा भी तैयार करवाया गया, जहां आने वाले लोग बैठकर पूजा-पाठ और विश्राम कर सकें। मंदिर का नया स्वरूप अब दूर-दूर से आने वाले लोगों को आकर्षित कर रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक मंदिर की मरम्मत नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और सामाजिक जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण है। जिस स्थान पर पहले बहुत कम लोग पहुंचते थे, अब वहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी है और लोग मंदिर की बदली हुई तस्वीर की सराहना कर रहे हैं।
अरुण कुमार का कहना है कि उनके पास संसाधन सीमित थे, लेकिन भगवान के प्रति श्रद्धा असीम थी। इसी भावना के साथ उन्होंने मंदिर को संवारने का प्रयास किया। उनका मानना है कि यदि समाज का हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार धार्मिक और सामाजिक स्थलों के संरक्षण में योगदान दे, तो कई उपेक्षित धरोहरों को नया जीवन मिल सकता है।
ग्रामीणों ने बताया कि अरुण कुमार सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहते हैं और अपने कार्यों की जानकारी साझा करते रहते हैं। उनकी फेसबुक आईडी “अरुण कुमार” नाम से संचालित है, जहां वह अपने सामाजिक, धार्मिक और जनहित से जुड़े कार्यों के फोटो और वीडियो साझा करते हैं। मंदिर के जीर्णोद्धार से जुड़े वीडियो और तस्वीरें भी लोगों के बीच तेजी से चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
क्षेत्र के लोगों का मानना है कि आज जब अधिकांश लोग अपने व्यक्तिगत जीवन में व्यस्त हैं, ऐसे समय में एक युवक द्वारा अपनी मेहनत की कमाई और समय लगाकर धार्मिक धरोहर को नया स्वरूप देना समाज के लिए प्रेरणादायक संदेश है। लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे युवा पीढ़ी के लिए एक सकारात्मक उदाहरण बताया है।
अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि भविष्य में भी मंदिर के विकास कार्य जारी रहेंगे और यह स्थान क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान के रूप में स्थापित होगा।#UnnaoNews #ArunKumar #ShivMandir #TempleRenovation #MahadevTemple #SanatanDharma #VillageHero #InspiringStory #ReligiousFaith #MandirVikas #UPNews #GroundReport #HeritageRevival #SocialWorkIndia #NandiBaba #BhaktiNews #PositiveNewsIndia #YouthInspiration #CommunityDevelopment #ViralHindiNews

