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‘स्कूल का खेल मैदान कब्जाकर बना दिए मकान, विरोध किया तो मारपीट और धमकियां’… अलवर में पीड़ित परिवार ने लगाई न्याय की गुहार

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अलवर। राजस्थान के अलवर जिले की मुंडावर तहसील के गोपीपुरा गांव से सरकारी भूमि और सड़क निर्माण को लेकर विवाद का एक गंभीर मामला सामने आया है। गांव निवासी राजेंद्र प्रसाद ने आरोप लगाया है कि उनके घर के पास स्थित स्कूल के खेल मैदान पर कुछ लोगों ने कथित रूप से अवैध कब्जा कर मकान बना लिए हैं। इतना ही नहीं, हाल ही में सड़क निर्माण के दौरान जब उन्होंने कथित अनियमितताओं का विरोध किया तो उनके और उनके परिवार के साथ मारपीट, अभद्र व्यवहार तथा जान से डराने-धमकाने की घटनाएं हुईं। पीड़ित परिवार का कहना है कि वह इस कदर दहशत में है कि थाने जाकर एफआईआर दर्ज कराने की भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।

राजेंद्र प्रसाद के अनुसार 28 जून 2026 की सुबह करीब 11 बजे गोपीपुरा से टेहड़का मार्ग पर सड़क निर्माण का कार्य चल रहा था। उनका आरोप है कि मौके पर 15 से 20 दिन पहले पटवारी ने पैमाइश करवा दी गई थी जिससे पटवारी में आदेश दिया था कि 25 फुट रास्ता छोड़े जाने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में कथित रूप से विनोद पुत्र रामपत प्रभावशाली लोगों के दबाव और ठेकेदार के मिलीभगत के कारण सड़क का रुख बदल दिया गया, जिससे उन्हें नुकसान पहुंचा।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि गांव निवासी विनोद पुत्र रामपत तथा उसके साथ मौजूद अन्य लोगों ने पहले स्कूल के खेल मैदान पर अवैध कब्जा कर मकान बना लिए और अब सड़क निर्माण के दौरान भी अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया। राजेंद्र प्रसाद का कहना है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उनके परिवार के साथ कथित रूप से जोर-जबरदस्ती, मारपीट और धमकी दी गई। उनका आरोप है कि आरोपियों ने ऐसा माहौल बना दिया है कि पूरा परिवार भय के साये में जीने को मजबूर है।

पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें लगातार डराया-धमकाया जा रहा है और वे घर से बाहर निकलने में भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उनका आरोप है कि दबंगों के भय के कारण वे पुलिस तक अपनी शिकायत लेकर नहीं पहुंच पा रहे हैं। परिवार ने प्रशासन से सुरक्षा उपलब्ध कराने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

फिलहाल इस मामले में प्रतिवादी पक्ष का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि प्रशासन द्वारा जांच कराई जाती है तो वास्तविक स्थिति जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी। स्थानीय लोगों की नजरें अब प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं

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