श्रीगंगानगर।
राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ क्षेत्र से जमीन विवाद का एक गंभीर मामला सामने आया है। एक परिवार ने आरोप लगाया है कि न्यायालय में मामला लंबित होने के दौरान विपक्षी पक्ष ने समझौते का भरोसा देकर विवाद समाप्त करने की बात कही, लेकिन कुछ समय बाद उसी समझौते से मुकरते हुए दोबारा विवाद खड़ा कर दिया। पीड़ित का कहना है कि अब उनके परिवार को लगातार धमकियां दी जा रही हैं, मारपीट की घटनाएं हो रही हैं और बार-बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। परिवार ने अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
पीड़ित विनोद कुमार पुत्र भजनलाल के अनुसार, उनके परिवार की खातेदारी कृषि भूमि को लेकर विवाद उपखंड अधिकारी न्यायालय, सूरतगढ़ में विचाराधीन रहा। इस दौरान 27 फरवरी 2026 को न्यायालय ने संबंधित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश जारी किए थे। साथ ही भूमि से जुड़े रिकॉर्ड में किसी भी प्रकार के बदलाव या हस्तांतरण पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे ताकि विवाद और न बढ़े।
विनोद कुमार का कहना है कि न्यायालय के आदेश के बाद उन्होंने तहसीलदार सूरतगढ़ को प्रार्थना पत्र देकर राजस्व रिकॉर्ड की जमाबंदी में स्टे का नोट दर्ज करने की मांग भी की थी, जिससे भविष्य में कोई पक्ष रिकॉर्ड में बदलाव न कर सके और न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित हो सके।
इसी दौरान विपक्षी पक्ष ने आपसी समझौते का प्रस्ताव रखा। पीड़ित का कहना है कि समाज के लोगों और दोनों पक्षों की मौजूदगी में समझौता हुआ, जिसके बाद उन्हें विश्वास दिलाया गया कि अब आगे कोई विवाद नहीं होगा। इसी भरोसे में उन्होंने अपनी ओर से न्यायालय में चल रही कार्रवाई भी वापस ले ली और यह मान लिया कि मामला स्थायी रूप से समाप्त हो गया है।
लेकिन पीड़ित का आरोप है कि कुछ ही महीनों बाद विपक्षी पक्ष अपने वादे से मुकर गया और फिर से विवादित गतिविधियां शुरू कर दीं। उनका कहना है कि अब उन्हें और उनके परिवार को लगातार धमकियां दी जा रही हैं तथा मारपीट की घटनाएं भी हुई हैं। पीड़ित का आरोप है कि समझौता केवल उन्हें गुमराह करने और समय निकालने के उद्देश्य से किया गया था।
विनोद कुमार का कहना है कि उन्होंने पूरे घटनाक्रम की शिकायत पुलिस और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि कार्रवाई नहीं होने से विपक्षी पक्ष के हौसले बढ़ गए हैं और उनका परिवार लगातार भय और मानसिक तनाव के माहौल में जीवन बिताने को मजबूर है।
पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि न्यायालय द्वारा दिए गए यथास्थिति के आदेशों का सख्ती से पालन कराया जाए, राजस्व रिकॉर्ड में स्टे की स्थिति स्पष्ट रूप से दर्ज रखी जाए तथा यदि कोई पक्ष न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन कर रहा है तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की भी मांग की है।
