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सारण में जमीन की रजिस्ट्री बनी चर्चा का विषय, 59 वर्षीय महिला ने खरीदी लाखों की आवासीय भूमि, अब धमकियों से दहशत में पीड़ित परिवार

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सारण। बिहार के सारण जिले में एक जमीन रजिस्ट्री इन दिनों इलाके में चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। रिविलगंज अंचल के भदपा बुजुर्ग गांव में हुई इस डील ने गांव से लेकर तहसील तक हलचल मचा दी है। जानकारी के मुताबिक 59 वर्षीय मीणा देवी ने लाखों रुपये खर्च कर आवासीय भूमि अपने नाम कराई है। अब इस खरीद-फरोख्त को लेकर गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

बताया जा रहा है कि ग्राम भदपा बुजुर्ग निवासी मीणा देवी, पति मदन महतो ने करीब 3 लाख 36 हजार रुपये में एक कट्ठा पंद्रह धुर जमीन खरीदी है। यह जमीन थाना रिविलगंज क्षेत्र अंतर्गत स्थित बताई जा रही है। दस्तावेजों के अनुसार भूमि आवासीय योग्य परती जमीन है, जिस पर भविष्य में मकान निर्माण की संभावना जताई जा रही है।

रजिस्ट्री में दर्ज विवरण के मुताबिक खाता नंबर 121 के अंतर्गत सर्वे नंबर 605 और 606 की कुल 3.254-3.254 डिसमिल भूमि को मिलाकर यह सौदा किया गया। दोनों प्लॉटों को एक साथ जोड़कर कुल 0-1-15-0 रकबा यानी एक कट्ठा पंद्रह धुर भूमि हस्तांतरित की गई। जमीन के चारों तरफ निजी रास्ता, बलीराम सिंह की भूमि और अन्य सीमाएं दर्ज हैं।

दस्तावेजों में यह भी उल्लेख किया गया है कि विक्रेता ने पारिवारिक खर्च, परवरिश और अन्य जरूरी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए यह जमीन बेचने का निर्णय लिया। विक्रेता पक्ष ने दावा किया कि उन्होंने बिना किसी दबाव, लालच या धमकी के पूर्ण मानसिक संतुलन में यह सौदा किया और बाजार मूल्य के बराबर कीमत पर जमीन बेची।

सबसे खास बात यह रही कि पूरे भुगतान को बैंक ट्रांसफर के माध्यम से पूरा किया गया। रजिस्ट्री के अनुसार 3 लाख 36 हजार रुपये की पूरी धनराशि विलेख पर हस्ताक्षर से पहले ही अलग-अलग किस्तों में बैंक के जरिए प्राप्त कर ली गई थी। इसके बाद विधिवत विक्रय-पत्र तैयार कर जमीन का कब्जा भी खरीदार को सौंप दिया गया।

इसी बीच मामले ने नया मोड़ तब ले लिया जब पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि कुछ विपक्षी लोग लगातार उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। परिवार का कहना है कि दबंग पक्ष पैसे और रसूख के दम पर पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है। पीड़ितों का आरोप है कि गरीब होने की वजह से उनकी कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही और वे लगातार भय के माहौल में जीने को मजबूर हैं।

परिवार का यह भी कहना है कि यदि उन्हें जल्द न्याय और सुरक्षा नहीं मिली तो कोई बड़ी घटना हो सकती है। मामले को लेकर गांव में तनावपूर्ण माहौल बताया जा रहा है और लोग खुलकर बोलने से भी बच रहे हैं।

रजिस्ट्री में साफ तौर पर लिखा गया है कि अब इस संपत्ति पर पूर्ण अधिकार खरीदार का होगा और वह अपनी इच्छा अनुसार मकान बनाकर निवास कर सकती हैं या किसी अन्य उपयोग में ला सकती हैं। साथ ही भविष्य में किसी भी प्रकार के दावे को अवैध और अमान्य माना जाएगा।

फिलहाल जमीन की यह रजिस्ट्री और उससे जुड़ा विवाद पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों के बीच कानाफूसी तेज है और लोग इसे जमीन, दबंगई और आर्थिक मजबूरी से जुड़े बड़े मामले के रूप में देख रहे हैं।

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