चित्तौड़गढ़। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के कपासन थाना क्षेत्र से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत और शव जलाने के आरोप ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। मृतका के भाई ने अपने जीजा, भांजे और अन्य अज्ञात लोगों पर मिलकर हत्या करने और सबूत मिटाने के लिए शव को श्मशान में जलाने का गंभीर आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि शिकायत और एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे पीड़ित परिवार भय और तनाव में जी रहा है।
पीड़ित छगनलाल सुथार निवासी स्टेशन की पाण्डोली ने पुलिस को दिए गए बयान में बताया कि उसकी बहन मोहनी की शादी करीब 15-16 साल पहले नानालाल सुथार निवासी लांगच के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही पति-पत्नी के बीच विवाद चलता रहता था। आरोप है कि नानालाल आए दिन मोहनी के साथ मारपीट करता था और अन्य महिलाओं से संबंध होने के कारण घर में लगातार झगड़े होते थे। परिवार कई बार समझौता कराने की कोशिश करता रहा, लेकिन हालात कभी नहीं सुधरे।
परिजनों के अनुसार 4 मार्च 2026 को दोपहर के समय मोहनी अचानक लापता हो गई। इसके बाद परिवार ने रिश्तेदारों और आसपास के इलाकों में तलाश शुरू की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। अगले दिन कपासन थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई गई। पीड़ित परिवार का आरोप है कि इस दौरान भी उन्हें सही जानकारी नहीं दी गई और पूरा परिवार मानसिक तनाव में था।
मामले ने उस समय भयावह मोड़ ले लिया जब 6 मार्च को परिवार के लोग तलाश करते हुए एक नए श्मशान क्षेत्र के पास पहुंचे। आरोप है कि नानालाल उन्हें लगातार उस दिशा में जाने से रोकता रहा और डराने के लिए चीते के साए की बात कहता रहा। लेकिन जब परिजन वहां पहुंचे तो उन्हें जली हुई लकड़ियां, धुआं, महिला के जूते, पायजेब, ताबीज और अन्य सामान मिला। यह दृश्य देखकर परिवार के होश उड़ गए। परिजनों का आरोप है कि मोहनी की हत्या कर शव को वहीं जलाया गया।
शिकायतकर्ता ने एफआईआर में साफ तौर पर आरोप लगाया है कि नानालाल, उसका बेटा मुकेश और अन्य अज्ञात लोगों ने मिलकर साजिश के तहत मोहनी की हत्या की और फिर सबूत मिटाने के लिए शव को जला दिया। परिवार का कहना है कि आरोपी प्रभावशाली और खतरनाक प्रवृत्ति के लोग हैं, इसलिए उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा।
दस्तावेजों के अनुसार पुलिस थाना कपासन में बीएनएस की धारा 103(1) और 238(A) के तहत मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू करने की बात कही गई। थाना अधिकारी सुनील शर्मा द्वारा एफआईआर दर्ज होने का उल्लेख भी रिकॉर्ड में मौजूद है। लेकिन पीड़ित परिवार का आरोप है कि दो महीने से अधिक समय गुजरने के बावजूद अब तक न तो किसी आरोपी की गिरफ्तारी हुई और न ही कोई निर्णायक कार्रवाई सामने आई।
अब पीड़ित परिवार ने प्रशासन और उच्च अधिकारियों से गुहार लगाई है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए, ताकि मृतका को न्याय मिल सके और परिवार को सुरक्षा प्रदान की जा सके। इलाके में इस घटना को लेकर लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है और ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
