बिहार के भोजपुर जिले से एक ऐसा पारिवारिक मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर रिश्तों में बढ़ती दूरियों और टूटते परिवारों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मजदूरी कर परिवार चलाने वाले महेश चौधरी का आरोप है कि छोटी-छोटी बातों को लेकर उनकी पत्नी सरिता देवी बार-बार विवाद करती हैं और अब तलाक लेने की जिद पर अड़ गई हैं। मामला आरा कोर्ट तक पहुंच चुका है।
जानकारी के अनुसार महेश चौधरी भोजपुर जिले के तेघरा इलाके के रहने वाले हैं। वह शाहपुर इलाके में नॉनवेज होटल चलाकर और मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनकी शादी वर्ष 2016 में सरिता देवी से हुई थी। सरिता देवी के पिता का नाम भगवान चौधरी और मां का नाम लीलावती बताया जा रहा है। मायका पक्ष आरा के कायम नगर इलाके का रहने वाला है।
महेश चौधरी का कहना है कि शादी के शुरुआती वर्षों में सब कुछ सामान्य था, लेकिन धीरे-धीरे परिवार में विवाद बढ़ने लगे। पति का आरोप है कि पत्नी मायके वालों की बातों में आकर अक्सर झगड़ा करती हैं। उन्होंने दावा किया कि जब भी वह काम से लौटते हैं, घर में तनाव का माहौल बन जाता है और हर एक-दो महीने में बड़ा विवाद खड़ा हो जाता है।
तीन बच्चों का भविष्य अधर में
इस परिवार में तीन बच्चे हैं। एक बेटी रुचि और दो बेटे राजाराम तथा सबसे छोटी बेटी ऋषि हैं। महेश का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और भविष्य को लेकर वह लगातार मेहनत कर रहे हैं, लेकिन अब परिवार टूटने की कगार पर पहुंच गया है। उनका आरोप है कि पत्नी बच्चों को पिता के खिलाफ भड़काने की कोशिश करती हैं और घर का माहौल लगातार खराब होता जा रहा है।
ईद की छुट्टी में भी कोर्ट पहुंचा मामला
बताया जा रहा है कि ईद के कारण अदालतों में अवकाश का माहौल रहने के बावजूद दोनों पक्ष आरा कोर्ट पहुंचे। पति-पत्नी के बीच तलाक को लेकर चल रही तनातनी अब कानूनी लड़ाई में बदलती दिखाई दे रही है। हालांकि अभी तलाक नहीं हुआ है, लेकिन परिवार पूरी तरह टूटने की कगार पर पहुंच चुका है।
पति ने बचाने की लगाई गुहार
महेश चौधरी का कहना है कि वह परिवार को टूटने से बचाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी नाराजगी और गुस्से के कारण अगर रिश्ता खत्म हो गया तो सबसे ज्यादा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ेगा। उनका कहना है कि उन्होंने कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन अब मामला कोर्ट तक पहुंच गया है।
स्थानीय लोगों के बीच भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इसे बदलते पारिवारिक रिश्तों और बढ़ते वैवाहिक तनाव से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावना बनी हुई है, लेकिन कोर्ट में चल रही प्रक्रिया के कारण पूरे परिवार पर मानसिक दबाव बढ़ता जा रहा है।

