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दशक भर से मंदिर निर्माण में भरोसे का नाम: पारंपरिक शिल्पकार और आधुनिक तकनीक से आस्था को आकार दे रहा ‘श्रीराम गितांजली कंस्ट्रक्शन’

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धार्मिक आस्था और भारतीय स्थापत्य कला को जमीन पर उतारने का काम बीते करीब 20 वर्षों से लगातार किया जा रहा है। मंदिर निर्माण के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुका श्रीराम गितांजली कंस्ट्रक्शन आज गुणवत्तापूर्ण कार्य, पारंपरिक शिल्पकार और आधुनिक तकनीक के समन्वय के लिए जाना जा रहा है। कंपनी बीते एक दशक से मंदिर निर्माण से जुड़े कार्यों का न सिर्फ निष्पादन कर रही है, बल्कि अपने कार्यों के प्रचार-प्रसार के जरिए लोगों तक आस्था से जुड़े इस शिल्पकार को पहुंचा भी रही है।

निर्माणाधीन और पूर्ण हो चुके मंदिरों की संरचनाएं इस बात की गवाह हैं कि किस तरह पत्थरों में आस्था को तराशा जाता है। ऊंचे शिखर, कलश, नक्काशीदार स्तंभ, भव्य मंडप और पारंपरिक डिज़ाइन भारतीय मंदिर स्थापत्य की पहचान को जीवंत करते हैं। निर्माण में प्राचीन शिल्पकला की शैली के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिससे मजबूती और सौंदर्य दोनों का संतुलन बना रहे।

कंस्ट्रक्शन से जुड़े लोगों का कहना है कि बीते दस वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों में मंदिर, महाद्वार, मंडप, शिखर और अन्य धार्मिक संरचनाओं का निर्माण किया गया है। हर परियोजना में गुणवत्ता, समयबद्धता और विश्वास को प्राथमिकता दी जाती है। यही कारण है कि आज यह नाम मंदिर निर्माण के क्षेत्र में भरोसे का प्रतीक बनता जा रहा है।

धार्मिक आयोजनों, ट्रस्टों और स्थानीय समितियों के बीच इस कार्यशैली की चर्चा तेजी से फैल रही है। मंदिर निर्माण के साथ-साथ उसके प्रचार के जरिए लोगों को यह संदेश दिया जा रहा है कि भारतीय परंपरा और आस्था को संरक्षित रखना केवल निर्माण नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी है। विशेषज्ञ कारीगरों और अनुभवी शिल्पकारों की टीम इस कार्य को लगातार नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही है।

स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का मानना है कि ऐसे प्रयासों से न सिर्फ धार्मिक ढांचा मजबूत होता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए संस्कृति और परंपरा की विरासत भी सुरक्षित रहती है। बीते एक दशक की निरंतर मेहनत अब पहचान बन चुकी है और आने वाले समय में यह क्षेत्र और विस्तार लेने की ओर बढ़ रहा है।

 

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