बेवजह फंसाने का आरोप, फोन पर गिरफ्तारी की धमकी से दहशत में युवक, पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल

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संभल। उत्तर प्रदेश के संभल जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस कार्रवाई और आपसी विवाद दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमरोहा जिले के डिडौली थाना क्षेत्र के ग्राम असरफपुर फैजगंज निवासी एक युवक का कहना है कि उसे एक शिकायत के आधार पर बेवजह फंसाया जा रहा है। युवक का आरोप है कि पुलिस की ओर से लगातार फोन कर उसे जल्द गिरफ्तार किए जाने की बात कही जा रही है, जबकि उसका दावा है कि वह पूरी तरह निर्दोष है और उसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है।

जानकारी के अनुसार असमोली थाने में शाने आलम पुत्र अख्तर की ओर से एक लिखित शिकायत दी गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सलामुद्दीन पुत्र जाहिद हुसैन निवासी ग्राम चंदवार की मंडैया ने पहले भी कई बार गाली-गलौज और मारपीट की है। आरोप है कि 25 जून 2026 की शाम करीब चार बजे फोन पर गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी गई। शिकायत में यह भी कहा गया है कि मोबाइल पर अश्लील फोटो और आपत्तिजनक रिकॉर्डिंग भेजी गई तथा इस पूरे मामले में गुलेहसन और जाहिद के भी शामिल होने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने अपनी जान-माल के खतरे का हवाला देते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की है।

दूसरी ओर जिस व्यक्ति पर आरोप लगाए जा रहे हैं, उसका कहना है कि उसे झूठे मामले में फंसाया जा रहा है। उसका दावा है कि उसने किसी को न तो धमकी दी है और न ही कोई आपत्तिजनक सामग्री भेजी है। उसने आरोप लगाया कि पुलिस की ओर से लगातार फोन आ रहे हैं और कहा जा रहा है कि उसके हाथ में चोट या कट का निशान है, इसलिए उसे जल्द पकड़ लिया जाएगा। युवक का कहना है कि बिना निष्पक्ष जांच के उसे आरोपी मान लिया गया है, जिससे वह और उसका परिवार मानसिक तनाव में हैं।
इस पर गुलेहसन भी शामिल है
गुल हसन इनके मामा ससुर हैं जो इनको धमकाते रहते हैं और लड़ाई झगड़ा करते हैं और इसी वजह को लेकर धमकियां भी मिलती रहती है

मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है क्योंकि एक पक्ष गंभीर आरोप लगाकर कार्रवाई की मांग कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष खुद को निर्दोष बताते हुए पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की है या नहीं। पुलिस की ओर से भी इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

यदि युवक के आरोप सही हैं तो यह एक निर्दोष व्यक्ति को परेशान किए जाने का मामला हो सकता है, वहीं यदि शिकायतकर्ता के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह गंभीर आपराधिक मामला बन सकता है। ऐसे में निष्पक्ष और साक्ष्यों के आधार पर जांच ही पूरे विवाद की सच्चाई सामने ला सकती है।

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